Apnapan
आज जब मैंने किसी को अपना कहा तो,
एक सुनने वाले ने कहा मुझसे,
इतना भी अपनापन ठीक नहीं है,
हाँ,सच ही तो है इतना भी अपनापन ठीक नहीं है।।
मैं पुछती हूँ, सच कहने की हिम्मत क्यों नहीं रखते हो,
क्या तुम अपने बाहरी आडंबरो से थकते नहीं हो,
कब तक अपने दोहरे व्यक्तित्व को लेकर जीते रहोगे,
कभी तो सच स्वीकारोगे, तब खुद को भी न समझा पाओगे।
इसीलिए कहती हूँ बस खुद को अपना लो,
खुद से ही अपनापन कर लो,
कट जाएगी जिंदगी बहुत खूबसूरती से,
बहुत खूबसूरती से ।।
एक सुनने वाले ने कहा मुझसे,
इतना भी अपनापन ठीक नहीं है,
हाँ,सच ही तो है इतना भी अपनापन ठीक नहीं है।।
मैं भी अपनापन के झूठे दिखावे से थकने लगी हूँ,
क्योकि जिसे अपना कहो, वही अपनापन की अलग परिभाषा समझा जाता है,
तब समझ आता है,
हाँ,सच ही तो है इतना भी अपनापन ठीक नहीं है।।मैं पुछती हूँ, सच कहने की हिम्मत क्यों नहीं रखते हो,
क्या तुम अपने बाहरी आडंबरो से थकते नहीं हो,
कब तक अपने दोहरे व्यक्तित्व को लेकर जीते रहोगे,
कभी तो सच स्वीकारोगे, तब खुद को भी न समझा पाओगे।
फिर कौन समझेगा तुम्हारे इस अपनापन को,
कि, ये तुम्हारा सच्चा अपनापन है कोई दिखावा नहीं,
पर तब तक बहुत देर हो चुकी होगी मेरे यार,
सब अपनापन कि वही परिभाषा, जीवंत कर चुके होंगे,
कोई नहीं है अपना, कोई नहीं है अपना।इसीलिए कहती हूँ बस खुद को अपना लो,
खुद से ही अपनापन कर लो,
कट जाएगी जिंदगी बहुत खूबसूरती से,
बहुत खूबसूरती से ।।
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